रेमंड को ग्लोबल ब्रांड बनाने वाले उद्योगपति और रिकॉर्डधारी एविएटर का 28 मार्च 2026 को निधन, पीछे छोड़ गए प्रेरणादायक जीवन गाथा
देश के दिग्गज उद्योगपति और Raymond Group को वैश्विक पहचान दिलाने वाले विजयपत सिंघानिया अब इस दुनिया में नहीं रहे। 28 मार्च 2026 को उनका निधन हो गया। उनका जीवन जितना शानदार रहा, उतना ही संघर्षों और उतार-चढ़ाव से भरा भी रहा।
एक सफल बिजनेसमैन होने के साथ-साथ वह विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले एविएटर भी थे और ‘द कंप्लीट मैन’ ब्रांड के पीछे की सोच भी उन्हीं की थी। लेकिन जीवन के अंतिम दौर में उन्हें पारिवारिक और व्यावसायिक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा।
उनकी जिंदगी हमें कई गहरे और व्यावहारिक सबक सिखाती है—
विजयपत सिंघानिया के जीवन से 10 बड़े सबक
1. विरासत को आगे बढ़ाना जरूरी
उन्होंने रेमंड को एक साधारण टेक्सटाइल कंपनी से वर्ल्ड क्लास ब्रांड बनाया। सीख: परंपरा का सम्मान करें, लेकिन बदलाव अपनाएं।
2. पैशन कभी मत छोड़िए
67 साल की उम्र में हॉट एयर बैलून से वर्ल्ड रिकॉर्ड और माइक्रोलाइट से लंबी उड़ान—यह साबित करता है कि जुनून उम्र का मोहताज नहीं।
3. मेहनत का कोई विकल्प नहीं
रेमंड की सफलता उनके विज़न और लगातार मेहनत का नतीजा थी।
4. बड़े फैसलों में सावधानी जरूरी
अपनी 37% हिस्सेदारी बेटे गौतम सिंघानिया को देना, जिसे बाद में उन्होंने गलती माना—यह सिखाता है कि अहम फैसले सोच-समझकर लें।
5. आत्मविश्वास और साहस रखें
रिटायरमेंट की उम्र में भी उन्होंने नए रिकॉर्ड बनाए—यह दिखाता है कि हौसला सबसे बड़ी ताकत है।
6. जिंदगी कभी पूरी नहीं होती
अपनी किताब An Incomplete Life में उन्होंने लिखा—जीवन हमेशा अधूरा लगता है, इसे स्वीकार करें।
7. सादगी और विनम्रता अपनाएं
इतनी सफलता के बाद भी उनका स्वभाव जमीन से जुड़ा रहा।
8. गलतियों से सीखें
उन्होंने खुले तौर पर अपनी गलतियों को स्वीकार किया—यह एक सच्चे लीडर की पहचान है।
निष्कर्ष:
विजयपत सिंघानिया का जीवन हमें यह सिखाता है कि सफलता और असफलता दोनों ही जीवन का हिस्सा हैं। असली जीत उसी की होती है जो हर परिस्थिति से सीखकर आगे बढ़ता है।
उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनी रहेगी।

