नागपूर: बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट फ्लैट रद्द करने पर बिल्डर केवल 2% ही काट सकता है – महारेरा का बड़ा फैसला
नागपुर में फ्लैट बुकिंग रद्द होने पर रिफंड को लेकर महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (महारेरा) ने घर खरीदारों के हित में एक अहम फैसला सुनाया है। महारेरा ने स्पष्ट किया है कि यदि फ्लैट बुकिंग के बावजूद बिक्री का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट नहीं हुआ है और बुकिंग रद्द करने की प्रक्रिया 60 दिनों के बाद की गई है, तो बिल्डर रिफंड राशि में अधिकतम 2 प्रतिशत से ज्यादा कटौती नहीं कर सकता। इस फैसले से उन हजारों खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो बिना एग्रीमेंट के फ्लैट बुकिंग रद्द होने पर बिल्डरों की मनमानी कटौती का सामना कर रहे हैं।
यह फैसला नागपुर निवासी महिला खरीदार मिनल मोहरले की शिकायत पर सुनाया गया। मिनल मोहरले ने फरवरी 2025 में नागपुर के बेलतरोड़ी-2 क्षेत्र में स्थित एसडीपीएल आश्रय प्रोजेक्ट में विंग-बी का फ्लैट नंबर 611 बुक किया था। इस फ्लैट की कुल कीमत 20.97 लाख रुपये तय की गई थी। बुकिंग के दौरान और बाद में उन्होंने अलग-अलग किश्तों में कुल 10.31 लाख रुपये का भुगतान बिल्डर को किया था। हालांकि, इसके बावजूद बिल्डर और खरीदार के बीच बिक्री का कोई औपचारिक रजिस्टर्ड एग्रीमेंट नहीं किया गया था।
अगस्त 2025 में पारिवारिक चिकित्सा आपातकाल के कारण मिनल मोहरले ने फ्लैट बुकिंग रद्द करने का निर्णय लिया और बिल्डर से अपनी जमा राशि वापस मांगी। कई बार अनुरोध करने के बाद भी बिल्डर ने केवल 4 लाख रुपये ही लौटाए, जबकि शेष रकम के भुगतान में लगातार देरी की गई। इस स्थिति से परेशान होकर मिनल मोहरले ने महारेरा में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में उन्होंने रेरा अधिनियम की धारा 18 के तहत शेष 6.31 लाख रुपये पर 18 प्रतिशत ब्याज और मानसिक तनाव के लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी। वहीं, बिल्डर संदीप डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने 10 प्रतिशत कटौती का दावा करते हुए करीब 9.27 लाख रुपये लौटाने की बात कही, लेकिन तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया।
मामले की सुनवाई के दौरान महारेरा सदस्य महेश पाठक ने स्पष्ट किया कि बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के फ्लैट बुकिंग रद्द होने की स्थिति में बिल्डर केवल 2 प्रतिशत तक की ही कटौती कर सकता है। महारेरा ने आदेश दिया कि कुल बुकिंग राशि 20,97,160 रुपये में से सिर्फ 2 प्रतिशत की कटौती की जाए। पहले से लौटाए गए 4 लाख रुपये को समायोजित करते हुए बिल्डर को शेष राशि 26 जनवरी 2026 तक मिनल मोहरले को लौटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, दोनों पक्षों को भुगतान से जुड़े प्रमाण महारेरा के समक्ष प्रस्तुत करने के भी आदेश दिए गए हैं।
महारेरा का यह फैसला घर खरीदारों के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। इससे साफ संदेश जाता है कि बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के बिल्डर खरीदारों की राशि पर मनमानी कटौती नहीं कर सकते। रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में इस निर्णय को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।